अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में पश्चिम बंगाल के कोलकाता (हालिशहर) से पधारीं विश्वविख्यात लेखिका बेबी हालदार उपस्थित रहीं। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में बालाघाट (मध्यप्रदेश) के सुप्रसिद्ध गीतकार, ग़ज़लकार तथा शिखर साहित्य संस्था, बालाघाट के महासचिव अशोक कुमार सिंहासने ‘असीम’ ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज की। विशिष्ट अतिथि के रूप में एस.एन.जी. विद्या पीठ के अध्यक्ष वी. के. बाबू तथा समीक्षक एवं विशेष अतिथि के रूप में पत्रकार-कथाकार शिवनाथ शुक्ल और मुक्तस्वर के मुख्य संरक्षक रजनीकांत श्रीवास्तव उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रसिद्ध गायिका सोनाली सेन द्वारा सरस्वती वंदना एवं वंदे मातरम् गीत की मधुर प्रस्तुति से हुआ। इस अवसर पर मुक्तस्वर साहित्य समिति से जुड़ी कृतिकार शीशलता शालू की पुस्तक “शालू के प्यार भरे नगमें”, संतोष जाटव जालौनी की पुस्तक “फर्ज के दीपक जलायें” तथा शंकर भट्टाचार्य की पुस्तक “दीवार पर टंगी तस्वीर” का विधिवत विमोचन किया गया।
महिला दिवस के उपलक्ष्य में सुप्रसिद्ध गायिका सोनाली सेन को महिला दिवस नारी सम्मान से सम्मानित किया गया तथा गीत वितान कला केन्द्र की ओर से विश्वविख्यात लेखिका बेबी हालदार को भी महिला दिवस नारी सम्मान प्रदान किया गया।
विमोचित पुस्तकों के रचनाकारों शीशलता शालू, संतोष जाटव जालौनी एवं शंकर भट्टाचार्य ने अपनी पुस्तकों से प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया। इसके पश्चात समीक्षकों अशोक कुमार सिंहासने ‘असीम’, शिवनाथ शुक्ल तथा रजनीकांत श्रीवास्तव ने अपने समीक्षात्मक वक्तव्य में कहा कि तीनों रचनाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से वर्तमान समाज के मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है।
तीनों रचनाकारों को शाल ओढ़ाकर, श्रीफल एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात वी. के. बाबू, शिवनाथ शुक्ल एवं रजनीकांत श्रीवास्तव को भी समिति की ओर से शाल, श्रीफल एवं मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया गया।
तत्पश्चात पश्चिम बंगाल से पधारीं लेखिका बेबी हालदार एवं मध्यप्रदेश से पधारे सुप्रसिद्ध गीतकार-ग़ज़लकार अशोक कुमार सिंहासने ‘असीम’ को मुक्तस्वर साहित्य अलंकरण – 2026 से अलंकृत किया गया। इस अलंकरण के अंतर्गत उन्हें शाल ओढ़ाकर, श्रीफल, मोमेंटो, सम्मान पत्र एवं सम्मान राशि भेंट की गई।
नई दिल्ली के जाने-माने व्यंग्यकार, उपन्यासकार एवं न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन के संचालक एम.एम. चन्द्रा, जिन्हें कार्यक्रम की अध्यक्षता करनी थी, अपने पिता के आकस्मिक अस्वस्थ होने के कारण कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके। उनकी अनुपस्थिति में उनका मुक्तस्वर साहित्य अलंकरण सम्मान समिति के उप-सचिव शंकर भट्टाचार्य को सौंपा गया, जिसे बाद में उन्हें प्रेषित किया जाएगा।
इसके पश्चात दीर्घकालिक साहित्य सेवा के लिए समिति के अध्यक्ष गोविन्द पाल को आजीवन उपलब्धि (लाइफ़ टाइम अचीवमेंट) सम्मान से सम्मानित किया गया।
अतिथियों को प्रदान किए गए सम्मान पत्रों का वाचन समिति की संरक्षक नेहा वार्ष्णेय, महासचिव नरेंद्र सिक्केवाल, कोषाध्यक्ष संतोष जाटव जालौनी तथा प्रधान संपादक दुलाल समाद्दार ने किया।
कार्यक्रम में अंचल के प्रबुद्धजनों तथा सैकड़ों साहित्य प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रमुख रूप से समिति के संयोजक वासुदेव भट्टाचार्य, मीडिया प्रभारी अर्जुन मंडल, सह-संपादक दयालन उन्नी माधवन, कानूनी सलाहकार सत्यवती शुक्ल, कार्यकारिणी सदस्य आकांक्षा तिवारी, शमशीर शिवानी, आर.एन. देबनाथ, विपुल सेन तथा राजस्थान के उदयपुर से आए सुप्रसिद्ध आलोचक-कथाकार-कवि डॉ. नरेंद्र निर्मल सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
गीत वितान कला केन्द्र से अध्यक्ष श्रीमती रजनी सिन्हा, सचिव मिथुन दास, उद्योगपति कैलाश बरमेचा सहित अनेक साहित्यकारों, कलाकारों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम का संचालन मुक्तस्वर साहित्य समिति के अध्यक्ष गोविन्द पाल ने किया तथा अंत में आभार प्रदर्शन महासचिव नरेंद्र सिक्केवाल ने किया।
गोविन्द पाल
अध्यक्ष
मुक्तस्वर साहित्य समिति
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